Breaking News
Home / भूगोल / पृथ्वी की उत्पत्ति

पृथ्वी की उत्पत्ति

पृथ्वी की उत्पत्ति

पृथ्वी की उत्पत्ति के सम्बन्ध में सम्भवतः सर्वप्रथम तर्कपूर्ण परिकल्पना का प्रतिपादन फ्रांसीसी वैज्ञानिक ‘ कास्ते द बफन ‘ ने 1749 ई . में किया था । ग्रहों की उत्पत्ति में भाग लेने वाले तारों की संख्या के आधार पर वैज्ञानिक संकल्पनाओं को दो वर्गों में बाँटा जाता है-

1 . अद्वैतवादी संकल्पना 2 . द्वैतवादी संकल्पना

अद्वैतवादी संकल्पना के अनुसार , ग्रहों तथा पृथ्वी की उत्पत्ति केवल एक ही वस्तु ( तारा ) से हुई मानी जाती है । इसमें काण्ट की ‘ वायव्य राशि परिकल्पना ‘ , लाप्लास की ‘ निहारिका परिकल्पना ‘ प्रमुख हैं ।

वायुमण्डल में वायु दाब

द्वैतवादी संकल्पना के अनुसार , ग्रहों तथा उत्पत्ति एक से अधिक खासकर दो तारों के संयोग से हुई है । इसमें चैम्बरलिन की ‘ ग्रहाणु परिकल्पना ‘ , जेम्स जींस की ‘ ज्वारीय परिकल्पना ‘ , रसेल की ‘ द्वैतारक परिकल्पना ‘ एवं आटो श्मिड की ‘ अन्तरतारक धूल परिकल्पना प्रमुख हैं ।

अत : उत्पत्ति को लेकर कोई एकमत नहीं है । फिर भी ऐसा माना जाता है कि प्रारम्भ में पृथ्वी चट्टानी , गर्म एवं एक वीरान ग्रह थी । इसका वायुमण्डल भी विरल था , जो हाइड्रोजन व हीलियम से बना था और आज के वायुमण्डल से बिल्कुल भिन्न था । अत : अनेक ऐसी घटनाएं एवं क्रियाएं हुईं , जिनके कारण यह एक सुन्दर ग्रह में परिवर्तित हुई । यद्यपि पृथ्वी पर जीवन का विकास 460 करोड़ वर्ष पूर्व हुआ , परन्तु यह एक प्रक्रिया के तहत हुआ ।

Check Also

चन्द्रग्रहण

चन्द्रग्रहण जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है , तो उसे चन्द्रग्रहण ( Lunar …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *